नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों में नए उत्साह के साथ नई शुरुआत

 विद्यालय का नाम - पी एम श्री राजकीय उच्च माध्मिक विद्यालय , रायबका 

नए सत्र में नई गतिविधियों के साथ एक नई शुरुआत 



नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ एवं गतिविधियाँ

जैसा कि हम सभी जानते हैं, एक नया शैक्षणिक सत्र आरंभ हो चुका है। इस नए सत्र में सभी छात्र-छात्राएं एवं शिक्षकगण नवीन उत्साह एवं ऊर्जा के साथ शिक्षण-कार्य में संलग्न हैं। इसी उत्साहपूर्ण वातावरण को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री श्री योजना अंतर्गत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, रायबका (अलवर) में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक व मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया।


"इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का केवल मनोरंजन ही नहीं होता, बल्कि उनका बौद्धिक विकास भी सुनिश्चित होता है।"इन गतिविधियों में छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।

 कुछ गतिविधियाँ मनोरंजक थीं, तो कुछ ज्ञानवर्धक भी रहीं। शिक्षकों द्वारा छात्रों को जल स्रोतों से संबंधित जानकारी दी गई, जिससे बच्चों में पर्यावरणीय जागरूकता उत्पन्न हुई। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने न केवल सहभागिता की भावना सीखी, बल्कि आपसी सहयोग एवं टीमवर्क के महत्व को भी समझा।

जल स्रोतों पर आधारित गतिविधि
अगली गतिविधि के अंतर्गत शिक्षिका द्वारा बच्चों को जल स्रोतों की जानकारी दी जा रही है, जैसे—नल, कुएँ, तालाब आदि। इस गतिविधि में बच्चे केवल सुन ही नहीं रहे, बल्कि सक्रिय रूप से सहभागिता भी कर रहे हैं। वे शिक्षिका के साथ मिलकर जल स्रोतों की पहचान कर रहे हैं, प्रश्न पूछ रहे हैं और उत्तर भी दे रहे हैं। यह गतिविधि न केवल बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हो रही है, बल्कि उनके लिए मनोरंजन का साधन भी बन गई है। इस प्रकार, खेल-खेल में बच्चों को जल के विभिन्न स्रोतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो रही है।


सीख में छुपा मज़ा – एक रोचक गतिविधि
कक्षा में उस दिन कुछ अलग ही माहौल था। बच्चों में उत्साह देखते ही बनता था। शिक्षक द्वारा जल स्रोतों—जैसे नल, कुआँ, तालाब आदि की जानकारी दी जा रही थी। बच्चे न सिर्फ ध्यान से सुन रहे थे, बल्कि सवाल पूछ रहे थे, उत्तर दे रहे थे और खूब मज़े भी कर रहे थे।

लेकिन मज़ा यहीं खत्म नहीं हुआ! शिक्षक ने बच्चों को जल स्रोतों से आगे की बातें भी बताईं—जैसे कि कुछ कीड़ों के घर कैसे होते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है, वे कहाँ रहते हैं आदि। यह जानकारी केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इतनी रोचक तरीके से समझाई गई कि बच्चों को पढ़ाई बिल्कुल बोझ नहीं लगी।

सीखते-सीखते बच्चों ने न केवल नया ज्ञान प्राप्त किया, बल्कि एक नई दुनिया की झलक भी देखी। सच में, जब सीखना मज़ेदार हो, तो हर बच्चा खुद ही आगे बढ़ने को तैयार हो जाता है।


इस प्रकार, नए सत्र की यह शुभ शुरुआत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।


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